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कब और कैसे हुई RSS की स्थापना, कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन?

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कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. प्रणब के इस कदम पर राजनीतिक तूफान आया हुआ है. पार्टी के कई नेताओं ने प्रणब से अपील की है कि वे संघ के कार्यक्रम में शामिल न हों. संघ के कार्यक्रम में एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का पहुंचना अपने आप में खास मौका है. इस मौके पर ये समझना जरूरी है कि आखिर संघ की स्थापना कैसे और कब हुई और किस तरह ये संगठन आप 9 दशकों बाद दुनिया के सबसे बड़े संगठन के रूप में खुद को स्थापित कर चुका है.

दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने की थी. भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई थी. इस साल विजयदशमी के दिन संघ अपने 93 साल पूरे कर लेगा और 2025 में ये संगठन 100 साल का हो जाएगा. नागपुर के अखाड़ों से तैयार हुआ संघ मौजूदा समय में विराट रूप ले चुका है.

दो दर्जन से कम लोगों ने की शुरुआत

संघ के प्रथम सरसंघचालक हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई. इस बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे.

संघ का क्या नाम होगा, क्या क्रियाकलाप होंगे सब कुछ समय के साथ धीरे-धीरे तय होता गया. उस वक्त हिंदुओं को सिर्फ संगठित करने का विचार था. यहां तक कि संघ का नामकरण ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ भी 17 अप्रैल 1926 को हुआ. इसी दिन हेडगेवार को सर्वसम्मति से संघ प्रमुख चुना गया, लेकिन सरसंघचालक वे नवंबर 1929 में बनाए गए.

ऐसे नाम पड़ा आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यह नाम अस्तित्व में आने से पहले विचार मंथन हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल इन तीन नामों पर विचार हुआ. बाकायदा वोटिंग हुई नाम विचार के लिए बैठक में मौजूद 26 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना मत दिया, जिसके बाद आरएसएस अस्तित्व में आया.

‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ प्रार्थना के साथ पिछले कई दशकों से लगातार देश के कोने कोने में संघ की शाखायें लग रही हैं. हेडगेवार ने व्यायामशालाएं या अखाड़ों के माध्यम से संघ कार्य को आगे बढ़ाया. स्वस्थ और सुगठित स्वयंसेवक होना उनकी कल्पना में था.

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