Home कारोबार ‘पैतृक घर में आतंकवादियों ने लगा दी थी आग’

‘पैतृक घर में आतंकवादियों ने लगा दी थी आग’

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गाजियाबाद

1990 के जनवरी माह की सुबह मैं बालकनी में बैठकर चाय पी रहा था। तभी मेरे लैंडलाइन नंबर पर कश्मीर में मेरे घर के पास रहने वाले व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने बताया कि आपके घर के ऊपर के मंजिल में आग लगा दी गई है। यह सुनते ही मैं अवाक रह गया। जो घर हमारे पूर्वजों ने अपने खून-पसीने से बनाया था, उसके जलने की खबर से मैं बहुत निराश व क्षुब्ध हुआ। यह बताते एमएमएच कालेज गाजियाबाद के पूर्व प्रोफेसर जेएल रैना की आंखों में आंसू आ गए। रैना बताते हैं, ”यूं तो हम 1948 में ही कश्मीर से विस्थापित होकर गाजियाबाद आ गए थे, लेकिन अपनी कश्मीरियत को हमने हमेशा कायम रखा। नौकरी की भागदौड़ के बीच समय निकालते हुए कश्मीर अपने घर अक्सर जाया करता था। वहां अपने पूर्वजों की यादें संजोकर रखी थी। उस घर के जलने की खबर सुनकर मैं अवाक था।”

राजनगर निवासी जेएल रैना बताते हैं कि उनके पिता आजादी से पूर्व सरकारी नौकरी में थे। 1948 तक वह परिवार सहित श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके में अपने पैतृक घर पर ही रहते थे। बाद में नौकरी छोड़कर वह 1948 में गाजियाबाद आ गए। जेएल रैना गाजियाबाद में ही रहे, मगर अपने पूर्वजों की भूमि से उनका लगाव हमेशा बना रहा। रैना बचपन के दिन याद कर बताते हैं कि गर्मियों की छुट्टियां हों या कोई बड़ा त्योहार, हम अपने पूर्वजों के घर में ही जाकर मनाते थे। पूरा परिवार एकत्रित होता और खूब मजे करता था। उन्होंने बताया कि आसपास माहौल भी अच्छा था। पड़ोसी भी हमसे अच्छा व्यवहार रखते थे। मगर धीरे-धीरे वहां से पाकिस्तानी अलगाववादी अपनी जगह बना रहे थे। 1989 आते-आते वहां की स्थिति बहुत खराब हो गई। रोज समाचार पत्रों में तरह-तरह की खबरें आने लगीं। फिर एक दिन अचानक खबर मिली कि आपका घर आतंकियों ने जला दिया है। यह सुनते ही बड़ा धक्का लगा। वहां से आने वाले कई रिश्तेदारों ने बताया कि वहां हिदुओं को घरों से निकालकर मारा जा रहा है। 1990 के बाद माहौल ऐसा खराब हुआ कि दोबारा कश्मीर जाने की हिम्मत नहीं पड़ी। ‘5 फीसद लोगों ने मारा तो बाकी के 95 फीसद से क्या किया’

रैना कहते हैं कि महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि कश्मीर में मात्र 5 फीसद अलगाववादियों ने कश्मीरी पंडितों के साथ जुल्म किया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बाकी के 95 फीसद उन्हें बचाने के लिए आगे क्यों नहीं आए। जिस कश्मीर को महात्मा गांधी ने धर्मनिरपेक्षता की मिसाल बताया था, उस कश्मीर को आतंकवाद ने जहन्नुम बना दिया। सरकार को चाहिए कि कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दे, खासकर मदरसों पर ताकि जेहादी मानसिकता को वहां पर कंट्रोल किया जा सके। नरेंद्र मोदी की सरकार ने 370 हटाकर बहुत ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘कश्मीरी पंडितों के लिए बने अलग कॉलोनी’

जेएल रैना ने कहा कि कश्मीरी पंडित अब एक ही स्थिति में वापस घाटी जा सकते हैं कि पहले तो उन्हें सुरक्षा की गारंटी मिले। साथ ही घाटी में रहने के लिए सरकार उनके लिए अलग से कॉलोनियां बनाए। तभी कश्मीरी हिदू वहां पर जाकर रह सकेंगे। मोदी सरकार ने जो हिम्मत दिखाई, ऐसे पिछले 70 सालों में कोई नहीं दिखा पाया। मोदी आगे भी कश्मीर के लिए अच्छा ही करेंगे। कश्मीर को अलगाववादियों के चंगुल से छुड़ाना बहुत जरूरी है। यह अलगाववादी कश्मीर के बच्चों के हाथ में पत्थर पकड़ाते हैं, मगर इनके खुद के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं। वहां उद्योगों व शिक्षा का विकास हो तो धीरे-धीरे कश्मीरी भी देश के और लोगों की तरह विकास की राह पर चलेंगे।

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