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शह के नाज पर इतराते लोग

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आज कुछ हटकर…
नवीन द्विवेदी 
हमारे द्वारा साक्षात्कार  ऋंखला ‘फेस टु फेस’ के जरिये अब तक कितनी ही शख्सियतों से हम आपकी मुलाकात करा चुके हैं। उनकी सफलता और समर्थता के पक्षों को उजागर करा चुके हैं मगर आज कुछ हट कर। इतना तो हम जान ही चुके हैं ऊंचाई पर पहुंचा व्यक्ति समय की कीमत को बहुत अच्छी तरह समझता है। इसीलिए वह मौकै पर चौका लगाता है और कठिन गेंदों पर उसका स्कोर और भी अधिक बढ़ता है। पर ऐसा क्यों होता है कि ऊंचाई पर पहुंचने के बाद वह अपने समय की तो कीमत समझने लगता है पर सामने बैठे व्यक्ति के समय की कीमत ठीक से नहीं आंकता? ऐसी स्थितियां आपके पास भी आई होंगी मगर कोई उन्हें उजागर नहीं करना चाहता। सवाल यह है कि अगर पत्रकार उजाला ही उजाला पक्ष दिखाएगा तो फिर कृष्ण पक्ष का अंधेरा कौन दिखाएगा? क्या सत्ता और समाज के धुरंधरों की विरुदावली गान करना ही पत्रकार की भूमिका है? क्या तयशुदा कुछ सवालों के जवाब एकत्रित कर लेना ही साक्षात्कार का उद्देश्य है? यह जान लीजिये कि हमारी कलम सवाल जवाब वाली कुंजी नहीं तैयार करती है, यह तो सही को सही और गलत को गलत बताने की हिम्मत रखने वाली स्वाधीन कलम है। तो आईए आप भी शामिल हों हमारे इस अलग तरह के अनुभव में। आखिर यह पेशकश भी तो उस हकीकत को बयां कर रही है जिसे जानते तो हम सब हैं मगर किसी ने अब तक इस तरह लिखने का साहस नहीं किया। तो, आज कुछ हटकर…
 
नवीन (फोन पर) : मैडम हम आपकी सफलता की कहानी जानना चाहते हैं जिसे पढ़ लोग जागरूक होंगे। कब आना उचित होगा ?
सेलिब्रिटी :आप कल 4 बजे आ जाओ ….
नवीन ने तुरंत फोन से अपनी पूरी टीम जिसमें उच्च स्तरीय कैमरामेन और को-ऑरिनेटर इत्यादि शामिल हैं, उन्हें साक्षात्कार के लिए तय समय की सूचना दे दी ताकि समय से वहां पहुंचा जा सके।
दूसरा दिन… दोपहर के 3 बजे जब दिल्ली का पारा लगभग 44 डिग्री तक चढ़ा हुआ था,  हमारी टीम मुस्तैदी से तय वैन्यु की तरफ बढ़ चली …..
 अभी रास्ते में ही थे, 3.45 बजे मोबाइल पर संदेश आया, “आप 5  बजे आना …”
हम लगभग पहुच ही गये थे मगर गाड़ी कॉफ़ी हाउस की और मोड़ दी और इंतजार करने लगे।
…लगभग दोपहर 4.20 बजे हमारी  टीम वहां से चल पड़ी।
दोपहर 4.50 पर हम सेलिब्रिटी के घर पर थे।
… हमारी टीम को लॉबी में बेठेने का निर्देश हुआ ….
लॉबी में बैठे हम उनकी दीवारों पर लगे चित्रों को कई कई बार देखते रहे, 5.30 बज गए पर हमारा इन्तजार जारी था …
हमारे उत्साही कार्यकर्ताओं का उत्साह जवाब देेने लगा था कि अचानक खबर आई, “सेलिब्रिटी ऑफिस निकल रही हैं।”
हमारी टीम के लिए भी यही आदेश था कि हम उन्हें ऑफिस में मिलें।
 नवीन अपनी टीम के चेहरे पर रोष की भाषा को साफ़ तौर पर पढ़ पा रहे थे पर ‘सेलीब्रिटी’ की व्यस्तता का मान रखना भी जरूरी था।
हमारी टीम सेलिब्रिटी के दफ्तर की तरफ …..
शाम 6 बजे दफ्तर पहुंचे पर ये क्या, सेलिब्रिटी तो अपने स्टाफ के साथ मीटिंग करने लगी
….अबकी बार हम उनकी ऑफिस की लॉबी में बैठ कर इन्तजार करने लगे, यहां की दीवारोंं पर कुछ दूसरे चित्र टंगे थे, जिन्हें देखते हुए कुछ और वक्त बिताया जा सकता था।
 …..6 .30 बजते बजते टीम के सभी सदस्यों के चेहरे उतर गये थे ….
आखिर, निर्देश आया कि मीटिंग खत्म हो गयी है नवीन को सेलिब्रिटी ने अपने पास बुलाया है।
सेलिब्रिटी : बड़ी ही ख़ुशी हुई आप आये मगर मेरी फोटो तो मेरा फोटोग्राफर ही खींचेगा। तुम लोग अपने फोटोग्राफर से मेरी तस्वीर मत खीचना। प्रेस फोटोग्राफर पता नही केसे फोटो खीचेगे इसलिए हम अपना फोटोग्राफर खुद साथ रखते हैं ….
नवीन (मन ही मन सोच रहा था) : मैं यहां साक्षात्कार लेने आया हूं या चंदा मांगने ….
सेलिब्रिटी : सुनो, तुम अपने सवाल छोड़ जाओ। हम अपनी टीम से जवाब बनवा कर भेज देंगे। या फिर सवाल भी हम खुद तेयार करवा कर भेज देगे….
नवीन मन ही मन तय किया, इन्टरव्यु तो यही जाएगा…..

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