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देवगौड़ा के साथ आए नरेंद्र मोदी के दो पुराने यार, चंद्रबाबू नायडू और केसीआर

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कर्नाटक में जारी सियासी उठापटक के बीच दक्षिण भारत की राजनीति में एक नई गोलबंदी होते दिख रही है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने एचडी देवगौड़ा को फोन कर मदद की पेशकश की है. साथ ही उन्होंने विधायकों को विजयवाड़ा या विशाखापत्तनम में ठहराने की पेशकश की है.

दिलचस्प बात ये है कि चंद्रबाबू नायडू और केसीआर कभी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए का हिस्सा थे , लेकिन चंद्रबाबू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग पूरी न होने पर एनडीए से किनारा कर लिया, वहीं के. चंद्रशेखर राव बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ तीसरे मोर्चे के गठन में जोर शोर से जुटे हुए हैं.

बता दें कि देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 37 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही और कांग्रेस के समर्थन से कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा कर रही है. देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन में मुख्यमंत्री होंगे.

हालांकि, गुरुवार की सुबह बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने राजभवन जाकर किसानों और ईश्वर के नाम पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. दूसरी ओर येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण के खिलाफ कांग्रेस ने तीन घंटे विधानसभा के बाहर जमकर प्रदर्शन किया. इसमें जेडीएस के विधायक भी शामिल हुए, तो कांग्रेस को दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन मिला.

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अलावा गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी महासचिव के सी वेणुगोपाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिमा के सामने बैठकर विरोध जताया. तीन घंटे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता और विधायक वापस ईगलटन रिजॉर्ट चले गए.

पत्रकारों से बातचीत में सिद्धारमैया ने येदियुरप्पा को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय देने के राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले को ‘‘अभूतपूर्व’’ बताया. उन्होंने कहा कि अब येदियुरप्पा को उन विधायकों की सूची तैयार करनी होगी, जिनका समर्थन उन्हें प्राप्त है.

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने रातभर चली दुर्लभ सुनवाई के बाद येदियुरप्पा के कनार्टक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

देर रात दो बजकर 11 मिनट से आज सुबह पांच बजकर 28 मिनट तक चली सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में शपथ ग्रहण और सरकार के गठन की प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष लंबित इस मामले के अंतिम फैसले के दायरे में होगा.

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एके सीकरी, न्यायमूर्ति एस के बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की एक विशेष पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार सुबह की तारीख तय की और बीजेपी द्वारा कर्नाटक के राज्यपाल को दिये गए विधायकों के समर्थन वाला पत्र पेश करने का आदेश दिया.

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