Home खबर सब्सिडी के नाम पर किसानों से धोखाधड़ी, बैंक मैनेजर गिरफ्तार

सब्सिडी के नाम पर किसानों से धोखाधड़ी, बैंक मैनेजर गिरफ्तार

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छत्त्तीसगढ़ में पॉली हाउस बनाने के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले बैंक कर्मियों और कंपनियों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू हुई है. इस मामले में पहली गिरफ्तारी रायपुर के आरंग इलाके से हुई है. आरंग के बैंक ऑफ़ बड़ौदा के मैनेजर को पुलिस ने चार सौ बीसी के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया है. दरअसल राज्य के आधा दर्जन जिलों में अच्छे उत्पादन और कमाई का भरोसा दिलाकर कई कंपनियों ने किसानों को लाखों की चोट पहुंचाई थी.

रायपुर, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बालोद, कवर्धा और बेमेतरा के डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों ने पॉली हॉउस बनाने वाली अलग-अलग कंपनियों और पांच राष्ट्रीयकृत बैंकों के अलग-अलग 28 ब्रांच मैनेजरों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी. पिछले साल धोखाधड़ी का शिकार हुए किसानों की शिकायत पर अब जाकर कार्रवाई हुई है. बताया जा रहा है कि बैंको के मैनेजर और एग्रीकल्चर कंपनियों के बीच सुनियोजित सांठगांठ हुई है.

सरकार की कृषि योजनाओं के लिए दी जाने वाली रियायती और सब्सिडी वाले लोन व प्रोजेक्ट से किसानों को लाभान्वित किए जाने के प्रयास हुए. बैंक के अधिकारीयों ने किसानों से कई कोरे दस्तावेजों और चेक पर साइन करवा लिए. इसके बाद बैंक से जारी लोन का आधा हिस्सा ही किसानों को मिल पाया. जबकि शेष रकम आरोपियों ने अपने खाते में डलवा ली. आखिरकर किसानों के कड़े विरोध के बाद धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला रायपुर से शुरू हुआ है.

रायपुर के पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा के मुताबिक आरोपी श्याम बंदिया ने 2015 में आरंग में पोस्टिंग के दौरान किसानों को सरकार से सब्सिडी दिलाने का आश्वासन दिया. फिर दर्जनों किसानों का लोन भी स्वीकृत कराया. श्याम बंदिया ने 30-30 लाख रुपए के चेक पर किसानों के हस्ताक्षर लेकर पूरी रकम अपने और पॉली हाउस निर्माण करने वाली एक कंपनी के डायरेक्टर भरत पटेल के खाते में डलवा दी.

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक महासमुंद जिले के ग्राम मानपुर के रहने वाले किसान डोमार सिंह और मोहनलाल ध्रुव ने शिकायत की थी कि भोपाल की प्रभावी बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर बैंक मैनेजर ने उसके अलावा और भी कई किसानों के साथ धोखाधड़ी की है. इसके बाद पुलिस ने एक जांच टीम गठित की थी. इस टीम को जांच में धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिले. उनके मुताबिक तत्कालीन बैंक मैनेजर ने बिना जांच एवं सर्वे के चार दिन के भीतर लोन स्वीकृत कर प्रभावी बायोटेक कंपनी के खाते में रकम भी ट्रांसफर कर दी.
कंपनी ने धोखाधड़ी करते हुए 2600 वर्ग पॉली फीट हाउस के निर्माण के स्थान पर सिर्फ 1800 वर्ग फीट पॉली हाउस निर्माण कर बैंक मैनेजर से मिलीभगत कर 2600 वर्ग फीट का बिल पास करा लिया. पुलिस को जांच में पता चला कि बैंक मैनेजर ने कमीशन के लालच में कई किसानों को खासी चपत लगाई थी. बैंक और बड़ौदा के मैनेजर श्याम बंदिया के खिलाफ की धारा 420 और 34 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया था. मैनेजर बांदिया का आरंग ब्रांच से जगदलपुर ट्रांसफर हो गया था. ज्ञात हो कि पुलिस ने बैंक ऑफ़ बड़ौदा जगदलपुर में दबिश देकर मैनेजर को गिरफ्तार किया है.

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