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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच के लिए दिया तीन महीने का समय

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ARUN THAKUR(SHIPRA DARPAN)

 मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच के लिए दिया तीन महीने का समय

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में 11 लड़कियों की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की. सुनवाई जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने की. आज सुप्रीम कोर्ट में की गई सुनवाई में इस मामले के आरोप ब्रजेश ठाकुर को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि इस मामले में आरोपियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा.

साथ ही आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई ने जांच के लिए 6 महीने का वक्त मांगा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का वक्त दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 आईपीसी और आईटी एक्ट और विजिटर जो लड़कियों का उत्पीड़न, ड्रग या ट्रैफिकिंग करते थे उनके बारे में भी जांच करने को कहा है.

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीआई से कहा था कि वो हत्या मामले की जांच 2 हफ्ते में पूरा करें. हालांकि सीबीआई की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा था कि दो हफ्ते में जांच पूरा नहीं हो सकता लेकिन वह इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर करेंगे. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वेकेशन बेंच के सामने जून माह में मामले को फिर से सुनवाई के लिए लगाया था.

इससे पहले सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बड़े लोगों को बचाने के आरोप को गलत बताया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सीबीआई ने शेल्टर होम आने वाले लोगों की जांच नहीं की. सीबीआई ने कहा था कि कुछ लोगों पर चार्जशीट दाखिल की है और पूरक चार्जशीट भी दाखिल करेंगे.

सीबीआई ने बताया था कि मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसके सहयोगियों ने कथित रूप से 11 लड़कियों की हत्या कर दी थी और कब्रगाह से हड्डियों का बंडल बरामद किया गया है.ऐसे में हत्या की जांच चल रही है. दरअसल, याचिकाकर्ता निवेदिता झा ने सुप्रीम कोर्ट नई अर्जी दायर कर सीबीआई पर आरोप लगाया है कि सीबीआई ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में 14 आरोपियों के खिलाफ जो चार्जशीट दायर की थी, वो बेहद हल्की धाराओं में दायर की थी.

अर्जी में कहा गया है कि चार्जशीट में इन आरोपियों पर रेप और हत्या की धाराएं लगाई नहीं गई हैं.याचिकाकर्ता ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल और उचित आदेश जारी करने की मांग की है.याचिकाकर्ता ने कहा है कि बिहार पुलिस द्वारा मामले की सही से जांच न करने के कारण ही जांच सीबीआई को ट्रांसफर की गई थी, लेकिन अब सीबीआई भी कुछ वैसा ही रवैया जांच के प्रति अपना रही है.इसलिए मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए.

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