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ममता की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय से बोले रहमान, ‘इस या उस पार्टी पर निर्भर ना रहें’

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कोलकाता कोलकाता पश्चिम बंगाल में ईद के मौके पर सीएम ममता बनर्जी के साथ अल्पसंख्यक आबादी से बातचीत में मुस्लिम उपदेशक काजी फजलुर रहमान ने उन्हें किसी भी राजनीतिक पार्टी पर निर्भर ना रहने की नसीहत दी। बता दें कि हर बार ईद के मौके पर मौलाना रहमान समुदाय विशेष के लोगों को संबोधित करते हैं। इस बार सीएम ममता बनर्जी भी उनके साथ मंच पर थीं। ममता ने भी अल्पसंख्यक समुदाय से कहा कि किसी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी उनसे टकराएगा, वह चूर-चूर हो जाएगा।
अल्पसंख्यक समुदाय को संबोधित करते हुए रहमान ने किसी भी राजनीतिक पार्टी या किसी व्यक्तिगत राजनेता का नाम नहीं लिया। हालांकि जिस किसी ने भी उनके संबोधन को सुना, उसने यह जरूर कहा कि पहली बार समुदाय विशेष के नेता ने समाज के भविष्य की झलक दिखाने की कोशिश की।
‘अपने भीतर झांकिए, अल्लाह पर कीजिए भरोसा’ अपने संबोधन में रहमान ने कहा, ‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस या उस पार्टी पर निर्भर ना रहें। इस समय कई ऐसे लोग आगे आए हैं, जिनके पास एक प्लान और अजेंडा है और यह समुदाय के पक्ष में नहीं है। मैंने सुना है कि कई मुस्लिम कहते हैं कि यह पार्टी हमारे हितों की रक्षा करेगी या फिर वह पार्टी हमारे विकास के लिए काम करेगी। कोई नहीं करेगा। आपने देखा है कि क्या हुआ है। खुद के भीतर झांकिए और अल्लाह में विश्वास कीजिए।’
एनआरसी पर भी चेताया रहमान ने आगे कहा, ‘आज कई अहम पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जो किसी खास प्लान और अजेंडा से काम कर रहे हैं। वे आपकी हर गतिविधि पर नजरें टिकाए हैं। गृहमंत्री (अमित शाह) ने पहले से ही कहा हुआ है कि बंगाल में एनआरसी लागू करेंगे। आप अपने व्यवसाय और बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दीजिए।’
‘नफरत करने वालों से प्यार कीजिए’ उन्होंने आगे कहा, ‘यदि कोई आपसे नफरत करता है या फिर हिंसक है तो आप उससे उलझिए मत उसे फूल दीजिए। इस्लाम ने हमें यही सिखाया है। विचारधारा के स्तर पर कोई आपका विरोध करता है तो आप उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाइए। ऐसा कोई नियम नहीं है कि जो हमारा विरोध करता है हम उससे हाथ ना मिलाएं या उसके साथ मिलकर ना रहें। यह मत भूलिए कि हम इस देश के नागरिक हैं और यहां हमारा बराबर अधिकार है।’
2011 में भी टीएमसी को चेताया था बता दें कि 2011 में भी रहमान ने सत्तारूढ़ टीएमसी को चेताते हुए कहा था कि वह समाज विशेष के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह समर्पित नहीं दिख रही है जबकि इस समाज के वोटरों की बदौलत वह सरकार में आई है। माना जा रहा है कि ईद के मौके पर ममता की मौजूदगी में ररहमान ने ‘इस पार्टी और उस पार्टी’ के बयान के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से टीएमसी को भी कड़ा संकेत दिया है।

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