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बदलेगी एयर इंडिया की ‘सरकारी’ छवि, एक कॉल पर मिलेगी सारी जानकारी

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ARUN THAKUR(SHIPRA DARPAN)

हाइलाइट्स

  • टेक सेवी पैसेंजर्स को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से लैस चैटबॉट की सुविधा मिलेगी
  • पैसेंजर्स को लुभाने के लिए कई सुविधाओं में सुधार पर भी काम किया जा रहा है
  • पैसेंजर्स की पसंद-नापसंद पर बनेगा डेटा बैंक, कॉल सेंटर्स का दायरा भी बढ़ेगा

नई दिल्ली
एयर इंडिया अब पैसेंजर्स को लुभाने के लिए ऐसी योजना पर कार्य कर रही है, जिससे उन्हें चंद मिनट में एक ही कॉल पर सारी जानकारियां उपलब्ध हो जाएं। एयरलाइंस की यह भी कोशिश है कि वह एक बार से अधिक यात्रा करने वाले पैसेंजर्स की पसंद, नापसंद को पहले ही नोट कर लेगी ताकि ऐसे पैसेंजर्स को दोबारा अपनी पसंद बताने की जरूरत न पड़े। इसके अलावा सूचना तकनीक का उपयोग करने वाले पैसेंजर्स को चैटबॉट की सुविधा भी देगी। इससे बिना किसी कर्मचारी से बात किये आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के जरिए टेक सेवी अपने सवालों का जवाब पा सकेंगे।

एयर इंडिया सूत्रों का कहना है कि उसकी इस योजना का मुख्य लक्ष्य यही है कि पैसेंजर्स को किसी तरह की असुविधा न हो और अगर आपातस्थिति में कुछ बदलाव होता है तो पैसेंजर्स तक फौरन उसकी जानकारी पहुंच जाए। सरकारी एयरलाइंस को उम्मीद है कि उसकी इस योजना पर सितंबर अक्टूबर से अमल शुरू हो जाएगा और इससे एयरलाइंस ‘सरकारी’ की इमेज से बाहर निकल सकेगी।

एयर इंडिया के अधिकारियों का कहना है कि अभी लगभग 80 फीसदी बुकिंग एजेंटों के जरिए होती है और कस्टमर का डेटा भी उनके पास ही होता है। ऐसे में आपातस्थिति में कई बार पैसेंजर तक जानकारी ही नहीं पहुंचती, क्योंकि आमतौर पर पैसेंजर का डेटा एयरलाइंस के पास नहीं होता। लेकिन एयरलाइंस अब पैसेंजर्स की सहमति लेकर उनका डेटा बैंक तैयार करेगी ताकि अगर पैसेंजर दोबारा यात्रा करता है तो उसकी पसंद, नापसंद की जानकारी तो एयरलाइंस के पास होगी ही, अगर विदेश में पैसेंजर का मोबाइल कॉल सुविधा बंद हो तो उससे ईमेल या वॉट्सऐप के जरिए संपर्क करके जानकारी दी जा सके।

एयर इंडिया का कॉल सेंटर सक्रिय है। लेकिन उसकी क्षमता 10 से 12 हजार कॉल अटेंड करने की ही है। कॉल लगभग 26 से 28 हजार लोग करते हैं। ऐसे में पैसेंजर्स को दिक्कत होती है। आर्थिक संकट से जूझ रहे एयर इंडिया की परेशानी यह है कि उसके कर्मचारी तेजी से रिटायर हो रहे हैं और अब वह कई जगह क्षेत्रीय कार्यालय बंद करके अपनी लागत को कम कर रहा है। ऐसे में ‘स्टेट ऑफ द आर्ट कॉल सेंटर’ उसके लिए बेहद मददगार होगा। यह कॉल सेंटर प्राइवेट प्लेयर तैयार करेगा। एयर इंडिया पर खर्च का बड़ा बोझ नहीं होगा। इस पर सालाना एयरलाइंस कंपनी को 30 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, बदले में उसे दो सौ करोड़ का बिजनेस मिलने की उम्मीद है।

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